बेरूख़ी

फुरसत के रातदिन एहसास हुआ आईने में देखने के बाद एक उम्र कट गयी है उनसे बेरूख़ी के बाद ज़मीन और फलक का भी रिश्ता अजीब है टूटे हुए दो दिल हैं उनसे बेरूख़ी के बाद मोहब्बत में फासलों की जाने कैसी रीत है चर्चा रहा ये आम उनसे बेरूख़ी के बाद हो उसका माफ़ हर गुनाह वो मेरा अ... [पूरी पोस्ट]
writer Shafaq
views
6
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
0
[28 Jan 2009 07:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix