किसी से कुछ ना हुआ

फुरसत के रातदिन किनारे पर कई थे लोग देखने वाले, मगर मै डूब गया और किसी से कुछ ना हुआ लगी जब आग तो सोचा उदास जंगल ने हवा के साथ रखी दोस्ती से कुछ ना हुआ हमें ये ख़ौफ़ की मिट्टी के हैं मका अपने उन्हे ये रंज की बहती नदी से कुछ ना हुआ बिखर गये हो शफक़ तुम तो मोतियो की त... [पूरी पोस्ट]
writer Shafaq
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[28 Jan 2009 07:47 AM]

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