जनशब्द

जनशब्द अंगूठे बताओ, कहाँ मारना है ठप्पा कहाँ लगाने हैं निशान तुम्हारे सफेद - धवल कागज पर हम उगेंगे बिल्कुल अंडाकार या कोई अद्भुत कलाकृति बनकर बगैर किसी कालिख, स्याही और पैड के अंगूठे गंदे हैं मिट्टी में सने है आग में पके हैं पसीने की स्याही में। - अरविन्द श... [पूरी पोस्ट]
writer arvind srivastava
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[05 Feb 2009 09:50 AM]

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