वोट और सत्ता के चक्रव्यूह में फँसी हिंदी

चिंतन दुनियां में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में हिंदी तीसरे नंबर पर है मगर भारत में ही उसकी दुर्दशा किसी से छुपी नहीं है। राजभाषा होने के कारण इसके नाम पर सरकारी अनुदानों और बजट की लूटखसोट तो खूब होती मगर विकास का ग्राफ निरंतर नीचे ही गिरता जा रहा है।... [पूरी पोस्ट]
writer डा.मान्धाता सिंह
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[05 Feb 2009 07:00 AM]

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