आमदनी चौअन्नी ,खर्चा अढईया !

संवेदना संसार बहुत पुरानी नही, बस ढाई तीन दशक पहले तक परम्परा और प्रवृत्ति थी कि कर्ज लेने वाला मुंह छिपाकर चलता था,क्योंकि कर्ज का अर्थ होता था उसकी लाचारी, जिसका उजागर होना लोग प्रतिष्ठा हनन मानते थे ।जबतक कर्ज चुक न जाए,जवान कुंवारी बेटी सा ह्रदय पर पहाड़ बन वह... [पूरी पोस्ट]
writer रंजना

आलेख.

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[05 Feb 2009 06:40 AM]

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