'कागजमल के आंसू'......................
दोस्तों आज अनायस ही बचपन की पढ़ी हुई कविता 'कागजमल के आंसू' याद आ गई ! सरकारी स्कूल में छुट्टी के घर वापस आते समय सभी गाते हुए आते थे ! कागज़ है ही ऐसी चीज की उसके वगैर जीवन कल्पना ही नही होती है ! पुराने जमाने के कीमती ग्रन्थ , पुराण , आदि कागज़ की...
[पूरी पोस्ट]
नटवर सिंह राठौड़
19
0
0
0
1
[05 Feb 2009 04:16 AM]



Shuffle








