जोल्ट फ़्रा॓म जबलपुर ...........!! नर्मदे हर !!
और तो कुछ न हुआ, पी के बहक जाने से बात मयख़ाने की, बाहर गई मयख़ाने से शाइर ने यह शेर कहते वक्त कभी भी यह न सोचा होगा के ये इतना अधिक प्रासंगिक बन जाएगा के हर जगह फ़िट बैठेगा। हा हा ! पिछले तीन चार दिनों की ज़ोरदार आल्हा-ऊदली बड़ी ही मज़ेदार रही। क्या कहना...
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[04 Feb 2009 23:58 PM]



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