आज उड़नतश्तरी जी घर पर ..

विवेक के व्यंग आज उड़नतश्तरी जी घर पर .. रामभरोसे की प्रति दी थी सप्रेम , आग्रह किया था कि कभी पधारकर हमारे ब्लाग को भी संवार दें .. व्यस्त जिंदगी में , सब कुछ है हम सब के पास , समय को छोड़कर . पर आज समीर लाल जी पधारे , और उनके हाथ लगने से यह ब्लाग भी कुछ बढ़िया सा लग... [पूरी पोस्ट]
writer Vivek Ranjan Shrivastava
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[04 Feb 2009 10:05 AM]

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