विडम्बना
हे प्रभु! मन मर गया है, मस्तिष्क शिथिल हो गया है, ह्रदय जल रहा है, फ़िर क्या बचा इस शरीर में? अब विचारों का आना भी नही होता कि उनसे पूछ सकूँ". दुखी होकर नारी ने प्रभु से यह प्रश्न किया. "किसी पुरूष को सुख देने के लिए, इतना ही काफ़ी है -- यदि तुम्हारे...
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Jyotsna Pandey
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[04 Feb 2009 05:53 AM]



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