जब से तुम हो गई

अशांत महासागर ये आंखें है पत्थराई अच्छी लगती है तन्हाई जब से तुम हो गई... ये दुनिया है इक मेला भीड़ में हूं फिर भी अकेला जब से तुम हो गई... अश्क बहाते हैं ये नैन अब न दिल को मेरे चैन जब से तुम हो गई... न चिड़िया करती मुझसे बातें अब न फूल ही मुझको भाते जब से तुम हो... [पूरी पोस्ट]
writer vijaymaudgill
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[04 Feb 2009 03:58 AM]

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