पड़ोसी -निरपेक्ष शहरी जीवन

surendrakishore आज सुबह सोकर उठा, तो देखा कि मेरा फोन कई दिनों के बाद एक बार फिर ‘डेड’ हो गया। आशंका थी कि संभवतः गत रात में भी किसी उदंड ट्रक ड्रायवर ने फोन के तार की परवाह किए बिना गाड़ी दौरा दी होगी। घर से बाहर निकला, तो दूर से ही यह लग गया कि तार फिर टूटा हुआ है... [पूरी पोस्ट]
writer Surendra Kishore
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[04 Feb 2009 03:20 AM]

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