तू जब गीत पढ़ती है....
तू जब गीत पढ़ती है दिल का सूरज इस तरह दिखता जैसे भरी दोपहर को गीतों की आवाज़ इस तरह लगती जैसे गंगा की लहर जैसे बैजू का नगमा पीड़ा अपनी बाहों में लेती है तेरे हुनर का इक तारा बजता है और तेरी मोहब्बत गाती है तेरी दो आँखे इस तरह जैसे ख्यालों के दो चश्मे...
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रंजना [रंजू भाटिया]
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[03 Feb 2009 01:39 AM]



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