पुर्नसंगठन
पिछली बार.. अनुभवहीनता से इस प्रकार ठोकरें खानी पड़ी । कोई पथ प्रदर्शक तथा सहायक नहीं, जिस से परामर्श करता । व्यर्थ के उद्योग धन्धों तथा स्वतन्त्र कार्यों में शक्ति का व्यय करता रहा । अब आगे..
पुर्नसंगठन
जिन महानुभावों को मैं पूजनीय दृष्टि से देखता था...
[पूरी पोस्ट]
डा. अमर कुमार
28
4
0
4
1
[02 Feb 2009 14:54 PM]



Shuffle








