पुर्नसंगठन

काकोरी के शहीद पिछली बार.. अनुभवहीनता से इस प्रकार ठोकरें खानी पड़ी । कोई पथ प्रदर्शक तथा सहायक नहीं, जिस से परामर्श करता । व्यर्थ के उद्योग धन्धों तथा स्वतन्त्र कार्यों में शक्ति का व्यय करता रहा । अब आगे.. पुर्नसंगठन जिन महानुभावों को मैं पूजनीय दृष्टि से देखता था... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[02 Feb 2009 14:54 PM]

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