कुछ ऐसी ग़ज़ल बनाओ
सब भाव यहाँ मिल जाएँगे, शब्दों के जाल बनाओ अब | जिससे भर जाए आंखे , कुछ ऐसी ग़ज़ल बनाओ अब | तेरा मेरा है अजर-अमर , रिस्तो के बाँध बनाओ अब | जिससे सज जाए अम्बर, एक ऐसा गाँव बसाओ अब | हर दुआ असर दायक होगी, मन्नत का दौर चलाओ अब, जिससे भर जाए दामन , कुछ...
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Tapashwani Anand
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[02 Feb 2009 08:08 AM]



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