मनमोहन जी का व्यंग संग्रह
वह पेशे से वकील हैं, पर रूचि रखते हैं हास्य-व्यंग में. ख़ुद भी व्यंग रचना करते हैं, और यहाँ-वहां से सुनी-पढीं व्यंग रचनाएं संग्रहित भी करते हैं. उनके संग्रह से स्वरचित एक रचना आप सबको समर्पित है. है कलिकाल तुम्हारी माया, सचमुच तीन लोक से न्यारी. मानव...
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Suresh Chnadra Gupta
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[01 Feb 2009 22:23 PM]



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