तुम्हे रात-दिन क्यूँ मैं सोचा करूँ ...
आप सबके सामने एक गीत नज़्र कर रहा हूँ ,जो मूलतः पहली गीत है इस ब्लॉग पे मेरी ।गलती के लिए मुआफी चाहूँगा .... तुम्हे रात-दिन क्यूँ मैं सोचा करूँ। तेरे ख्वाब ही अक्सर देखा करूँ॥ नहीं के हमें दिल लगना नही था तेरे हुस्न के गली में जाना नही था बना के खुदा...
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"अर्श"
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[01 Feb 2009 11:40 AM]



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