ओ प्रतिमा अनजानी
ओ प्रतिमा अनजानी , दिल की सतत कहानी कहता हूँ निज बात सुहानी , सुन लो ना । डूबा रहता था केवल जीवन की बोध कथाओं में अब खोया हूँ मैं रूप - सरस की अनगिन विरह - व्यथाओं में सत्य अकल्पित - मधुरित - सुरभित , अन्तरतम में हर पल गुंजित ओ प्रतिमा अनजानी , दिल क...
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हिमांशु
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[01 Feb 2009 04:13 AM]



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