स्याही से बाहर छिटकते अर्थ

उपस्थित एक वाग्दत्ता अपने होने वाले पति को विवाह से पहले की अन्तिम चिट्ठी लिखती है । चिट्ठी में वो लग्न की तय हुई तिथि की जानकारी देती है । कई बार कच्चे ड्राफ्ट को फाड़ने के बाद वो आश्वस्त होकर एक साफ़ सुथरे पन्ने पर अपना पत्र पूरा करती है । अंत में ' केवल तु... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[31 Jan 2009 20:33 PM]

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