"चुप हूँ , तुमको हैरानी है ......बोलूँगा परेशानी होगी ..."

vikshubdha ब हुत अरसा हुआ .....एक कवि मित्र हुआ करते थे ! उन दिनों मोबाइल फ़ोन तो थे नही बल्कि लैंड लाइंस भी घरों में कम ही हुआ करते थे ! एक बार फ़ोन बुक कर दो और फिर बैठे रहो साल दो साल इंतज़ार में ! बस आपसी मेल मिलाप ही संपर्क का सीधा साधा सा माध्यम था ...टच म... [पूरी पोस्ट]
writer विक्षुब्ध सागर
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[31 Jan 2009 19:00 PM]

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