मिलना केहिं बिधि होय

विनय पत्रिका मिलने न मिलने के बीच परसों मित्र अभय से बात हुई। मिलने की हुड़क जगी। लेकिन मिल नहीं पाया। हम अक्सर चाहते हुए भी मित्रों से नहीं मिल पाते। जिनसे मिलना अच्छा लगता है उनसे मुलाकात नहीं हो पाती । अभय के घर से बस हजार मीटर के फासले पर मैं था लेकिन मिलाप न... [पूरी पोस्ट]
writer बोधिसत्व
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[31 Jan 2009 18:35 PM]

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