चलिए ...ज़मी पर ख़ुदा ढूँढ़ते है !!!
मैं... एक दिन कुछ अपनी ज़िन्दगी से परेशां ...अपनी किस्मत का हिसाब किताब कर रहा था , हज़ारो सवाल मेरे इर्द गिर्द घूम रहे थे और मुझे चिढ़ा रहे थे बार बार मुझसे ये कहते ...आख़िर मैं ही क्यूँ ? हमेशा मेरे साथ ही ऐसा क्यूँ होता है ? ये तकलीफें ये मुसीबते हम...
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Anwar Qureshi
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[31 Jan 2009 07:45 AM]



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