बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया...

दिलीप के दिल से कभी खुद पे कभी हालात पे रोना आया, बात निकली तो हर इक बात पे रोना आया.... आज अभी तक दिल ग़मगीन है, दो तीन दिनों पहले के घावों की टीस अभी तक मन से रिस रही है. जैसे जैसे और मुम्बई की घटनायें सामने आ रही है,उन अपनों के बारे में पता चल रहा है,जो पिछले दिन... [पूरी पोस्ट]
writer दिलीप कवठेकर
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[30 Jan 2009 18:41 PM]

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