बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में

manthan अ मिताभ प्रियदर्शी जिन्दगी मेरे पास से हो कर गुजर गई, बैठा रहा मैं उसके इंतज़ार में। गुलों की तिजारत करता रहा उम्र भर, पर तकदीर फंस कर रह गयी खार में। क्यों मुहबत्त को करें बदनाम यारा, जब दिल ही बेवफाई कर गया। धोखा, फरेब, रुसवाई सब बेचारे हैं ये ख़ुद... [पूरी पोस्ट]
writer सुनील मंथन शर्मा
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[30 Jan 2009 09:19 AM]

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