बिना व्य‌वहारिकता के समस्त ज्ञान व्यर्थ है

धर्म यात्रा शास्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खा, यस्तु क्रियावान पुरुषः स विद्वान्। सुचिन्तितं चौषधमातुराणां , न नाममात्रेण करोत्यरोगम्।।" (कुछ लोग शास्त्र पढ कर भी सदैव मूर्ख ही रहते हैं,परन्तु जो व्यवहार में चतुर है वही व्यक्ति पंडित अर्थात विद्वान है.जिस प्रकार ए... [पूरी पोस्ट]
writer Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[30 Jan 2009 05:15 AM]

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