कोयले का अभिमान

Bas Yun Hi Nahin कोयले को इस बात का बहुत अभिमान था की वह जन साधारण के काम आता है। उअसके ताप से लोगों के चूल्हे जलाते है, लोहार की धौंकनी चलती है, सुनार का गहना गधाता है, कुम्हार के बर्तन आंव में पकाते हैं। अपने अभिमान में वह धू-धू कर जलता रहा और लोगों को बेवज़ह ताप भ... [पूरी पोस्ट]
writer Vibha Rani
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[30 Jan 2009 04:47 AM]

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