कोई कह सकेगा उसे...
मुझे विश्वास होता जा रहा है कि इस श्राप का तोड़ उस जालंधर वाले उस बूढ़े के पास ही है....शाम से याद कर रही हूं लेकिन नाम याद नहीं आ रहा उसका। दो साल पहले जनवरी में ही तो मिला था पहली और शायद आखि़री बार भी...। वो अपने हर मिलने वाले को क़लम बांटा करता...
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शायदा
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[29 Jan 2009 15:43 PM]



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