’छुक-छुक चलती ट्रेन टू मैरिज ’

अपना पराया मेरे एक मित्र हैं। उम्र ३० की हो चुकी है। जब उनसे कोई उनकी उम्र के बारे में पूछता तो वे लड़कियों की तरह शरमाते हैं। बस वैसे ही जैसे अपनी लाजवंती छूते ही सिकुड़ जाती है। पर वे लाजवंती की तरह रूठते नहीं है, सदा हंसते-मुस्कराते रहते हैं। जिंदादिली उनमें... [पूरी पोस्ट]
writer ram shankar
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[29 Jan 2009 10:34 AM]

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