बसंत
बसंत द्वार पर खड़ा है। ऐसे में सुनते हैं ये मधुर राग पं. राजन साजन मिश्र की आवाज़ में। संक्षिप्त परिचय राग बसंत - "दो मध्यम कोमल ऋषभ चढ़त न पंचम कीन्ह। स-म वादी संवादी ते, यह बसंत कह दीन्ह॥ आरोह - सा ग, म॑ ध रें॒ सां, नि सां। अवरोह - रें॒ नि ध॒ प, म॑ ग...
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Manoshi
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[28 Jan 2009 20:39 PM]



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