विदेशी शराब की सरकारी दुकान

विवेक के व्यंग विदेशी शराब की सरकारी दुकान ये लेखक भी बड़े अजीब किस्म के प्राणी होते हैं, जाने क्यों उन्हें वह सब भी दिखता है, जिसे और लोग देखकर भी नहीं देखते, शहर के मुख्य चौराहे पर गांधी जी की प्रतिमा है, उसके ठीक सामने, मूगंफली, उबले चने, अंडे वालों के ठेले लगते... [पूरी पोस्ट]
writer vivek ranjan shrivastava
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[27 Jan 2009 08:24 AM]

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