अमृता प्रीतम की कुछ अमर नज़्में

अमृता प्रीतम की याद में..... एक मुलाकात मैं चुप शान्त और अडोल खड़ी थी सिर्फ पास बहते समुन्द्र में तूफान था……फिर समुन्द्र को खुदा जाने क्या ख्याल आया उसने तूफान की एक पोटली सी बांधी मेरे हाथों में थमाई और हंस कर कुछ दूर हो गया हैरान थी…. पर उसका चमत्कार ले लिया प... [पूरी पोस्ट]
writer Jagdish Bhatia
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[27 Jan 2009 01:29 AM]

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