मेरे अधरों पर हस्ताक्षर
मेरे अधरों पर हस्ताक्षर प्रिये अधर से तुमने अपने जब से किये अधर पर मेरे
हस्ताक्षर, तब से सपनों की बगिया और निखर आई है आतुर हुई कामना भर ले यष्टि कमल को भुजपाशों में
आकाँक्षायें हैं सांसों की घुलें महक वाली सांसों में
नयनों की पुतली बन रांझा,चित्र हीर...
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राकेश खंडेलवाल
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[26 Jan 2009 20:42 PM]



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