अब गांव में भी ये देखने को नहीं मिलता
बहुत दिनों से एक मंज़र नज़रों के सामने घूम रहा है। ये मंज़र, ये दृश्य मैंने कई बार छुटपने में देखा है। दिमाग़ में अब भी वो शॉट फ्लैश बैक की तरह घूमते रहता है। लेकिन अब देखने को नहीं मिलता। कई बार कोशिश की तो पाया कि अब हिंदुस्तान का गांव भी बदल गया ह...
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Chandan Pratap Singh
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[26 Jan 2009 08:03 AM]



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