मां भारती का पैगाम... देशवासियों के नाम...
प्यारे बच्चों, आज देश ६० वां गणतंत्र मना रहा है लेकिन मैं इस आजादी से असंतुष्ट हूं... चिंतित हूं... कशमकश में हूं... क्योंकि मुझे शिकायत है... जिस देश के नेताओं के पास नीति न हो, कर्मचारियों के स्वभाव में जिम्मेदारी न हो, जहां दलालों और गुंडों का राज...
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विजययात्रा
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[26 Jan 2009 05:51 AM]



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