गणतंत्र दिवस पर शर्मिंदगी......... (लाल-एन-बवाल)
सना करें औ सलामियाँ हों , है सद्र शर्मिंदगी कहीं कुछ ? फ़तह का सामाँ दिखा रहे हों, के टाटे-पैबंदगी सभी कुछ !! --- समीर 'लाल 'और 'बवाल शब्दार्थ :- सना = स्तुति, वन्दना, प्रशंसा सलामियाँ = गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड सद्र = राष्ट्रपति और तमाम सियासतद...
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[25 Jan 2009 20:29 PM]



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