खून के रिश्ते ।
खून ही पीते रहे ये खून के रिश्ते । सदा ही रीते रहे ये खून के रिश्ते ॥ जोंक भी जीती सदा सबको पता कैसे । इसी तरह जीते रहे ये खून के रिश्ते ॥ घाव जो खाए भला कब ठीक वे होते । शूल से सीते रहे ये खून के रिश्ते ॥ वे समझते हैं हमें रोना...
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सहज साहित्य
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[25 Jan 2009 15:27 PM]



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