रूह की बेचैनी

दिल के दरमियाँ फूलों जैसा मेरा देश मुरझाने लगा शत्रुओं के पंजों में जकडा जाने लगा रात-दिन मेरी आँखों में एक ही ख्वाब कैसे हो मेरा 'प्यारा देश' आजाद कैसे छुडाऊँ इन जंजीरों की पकड से इसको कैसे लौटाऊँ वापस वही मुस्कान इसको कैसे रोकूँ आँसुओं के सैलाब को इसके कैसे खोलूँ... [पूरी पोस्ट]
writer Dr.Bhawna
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[24 Jan 2009 16:25 PM]

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