संस्कृति और इतिहास-बोध- 3

मत-मतांतर परंपरा को ताबीज़ बना कर रखने की जरूरत नहीं... किसी देश या जाति के इतिहास में क्या ग्राह्य है और क्या अग्राह्य- इसका सम्यक फैसला हमारी इतिहास-दृष्टि करती है। संस्कृति के अंदर सब कुछ बचा लेने लायक नहीं होता। बहुत कुछ समय की मार खाकर बेजान हो जाता है, इ... [पूरी पोस्ट]
writer राजू रंजन
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[24 Jan 2009 09:53 AM]

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