लगी आज सावन की फिर वह झड़ी है - आनन्द बक्षी
ग़म का दिल पर घाव बहुत गहरा होता है, ख़ुशी तो कोई भूल भी जाये मगर ग़म के अंधेरे कोई नहीं भूल पाया, ऐसा ही इस गीत में आनंद साहब ने लिखा है, मैं तो रोता हूँ साथ सावन भी रोता है! और यही सच है। Lagii Aaj Saawan Kii Phir Wo JaRii Hai - Anand Bakshi from V...
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विनय
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[24 Jan 2009 08:46 AM]



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