लम्हा...
सरसराते हुए पास से कई बार यूँ ही अचानक से.. देखता हूँ तो दूर तलक जाते हुए दिखता है वो लम्हा.. कोशिश की मैंने कई बार की पकड़ कर सिरहाने दबा के रख लूँ.. लेकिन कामयाब नही हो पाया.. एक दिन सुन रहा था गोलमाल का वो गाना.. आने वाला पल जाने वाला है.. ना जाने...
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केतन कनौजिया
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[24 Jan 2009 08:07 AM]



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