माया लोक और यथार्थ के बीच किसी भूगोल पर

उपस्थित सालों बाद इस जगह को छोड़ कर मैं फ़िर यहीं था। ये शहर आज भले ही इक्कीसवीं सदी में था पर ये बार बार अपनी प्राचीन स्मृतियों में लौटता था। लगता था जैसे ये काल के विशाल समुद्र में डूबता उतराता रहता था। जैसे प्राचीन और अर्वाचीन इसके लिए घर से बाहर निकलने के... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[24 Jan 2009 08:03 AM]

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