बात, यदि अधूरी है

नया प्रयत्न बात, यदि अधूरी है तो उसका अर्थ नहीं, यदि संभावनायें हैं तो उसे पूर्ण कर लेना व्यर्थ नहीं। कहा था किसी ने स्वीकार है मुझे भी- "कविता करो न करो कवि बन जाओ" और अपनी इस सहज मनोदशा में उस अदृश्य कविता में ही खो जाओ। पर कवि जिसके लिये "कविता एक कवच है, और... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु
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[24 Jan 2009 06:49 AM]

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