मैं जानने वाला हूँ

कुन्दकुन्द कहान आबाल -गोपाल सब ही वास्तव में जानने वाले को ही जानते हैं | लेकिन इसको जानने का जोर दिखता नहीं , इससे यह राग, द्वेष,पुस्तक,वाणी हैं इसलिए मुझे इनका ज्ञान होता है , ऐसा इसका जोर (झुकाव) पर में ही जाता है , श्रद्धा में अपने ज्ञान सामर्थ्य का विश्वास ही न... [पूरी पोस्ट]
writer प्रदीप मानोरिया

aatma

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[23 Jan 2009 23:33 PM]

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