सोने का पिंजर....
दूसरा अध्याय क्या धरा है ऐसी ममता में जहाँ की धरती पर मच्छर हैं, मक्खी हैं। चूल्हे पर चाय का पानी चढ़ा है, अल्मारी से शक्कर का डिब्बा जैसे ही उतारा तो पता लगा कि अरे शक्कर तो है ही नहीं। अब चाय कैसे बने? बैठकखाने में मेहमान बैठे हैं। माँ धीरे से बेटी...
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निखिल आनन्द गिरि
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[23 Jan 2009 23:33 PM]



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