ग़ज़ल - ऐसे मन मत मारा कर

kavideepakgupta ऐसे मन मत मारा कर हंसकर वक्त गुज़ारा कर जग से क्या ले जाएगा सोचा और विचारा कर अपनी सुध-बुध लेने को दरपन रोज़ निहारा कर मन के "मनके" महकेंगे मन से उसे पुकारा कर इस अँधेरी दुनिया में दीपक तू उजियारा कर कवि दीपक गुप्ता www.kavideepakgupta.com 9811153282... [पूरी पोस्ट]
writer kavideepakgupta
views
19
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
5
[23 Jan 2009 20:59 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix