हमसफर
तुम्हारे साथ सफर तय करना मुझे अच्छा लगता है। पर मैं तुम्हारा साया नहीं हूँ। मैं तुम्हारे आगे या पीछे नहीं चलना चाहती। मैं चाहती हूँ हम अपनी राह चल सके। तुम्हारे लिए मैं जड़े बन नमी खोज लाऊँ, पत्तियों सा जादू रचाऊँ...तुम खिल सको....बिल्कुल अपने रंगों...
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Beji
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[23 Jan 2009 01:36 AM]



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