अपने अर्थात मुस्कुराते मकडी के जाल
फरिश्तों ने अपनी सारी जादुई शक्ति और परियों ने मोह लेने का हुनर जीतू को दे दिया तभी तो वह अपनी छत से आश्चर्यों को सजीव घटित होते हुए देखा रहा था। पड़ोस के घर का स्नानघर चौबीस इंच टीवीनुमा दिखाई दे रहा था स्नानघर में विद्या बालन के रूप सौन्दर्य को मात...
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Kishore Choudhary
दिल-ऐ-नाकाम
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[23 Jan 2009 01:21 AM]



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