GAZAL

राही मासूम रज़ा का साहित्य गीतों की लय तेज हुई और कदमों की रफ्तार बढ़ी आँखों की दुनिया भी बदली, होठों की तलवार बढ़ी हाथ बढ़े काछों की जानिब टोक दिया चौपालों ने खेतों से जब आँख मिलाई खेतों के रखवालों ने पिछले राजा जैसे भी थे अच्छे थे अंग्रेजों से आँख निकल आई खेतों की सख्त लगान के... [पूरी पोस्ट]
writer डा. फीरोज़ अहमद
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[22 Jan 2009 22:47 PM]

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