कल
कल याद मेरी उसे रुला आई है ।
कल बात मेरी बिगड़ती बना आई है ।
कल शाम सुबह सा मन्ज़र कर ,
कल रात मेरी पतझड़ बहार आई है ।
कल क्या था कुछ खास नहीं ,
कल शाख मेरी लहरा लहरा आई है ।
कल चुप चाप दबे पावं चला आया ,
कल आवाज़ मेरी वहाँ से आई है ।
कल-कल [...]...
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hemjyotsana "Deep"
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[22 Jan 2009 20:11 PM]



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