केवल धन की नहीं, धर्म की भी वृद्धि करें

धर्म यात्रा महर्षि वेद व्यास जी ने कहा है कि जो व्यक्ति विशिष्ट सतपात्रों को दान देता है और जो कुछ अपनी दिनचर्या हेतु भोजन आच्छादन में प्रतिदिन व्यय करता है, उसी को मैं उस व्यक्ति का वास्तविक धन या सम्पत्ति मानता हूँ। अन्यथा शेष सम्पत्ति तो किसी और की है, जिसकी... [पूरी पोस्ट]
writer Pt.डी.के.शर्मा"वत्स"
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[21 Jan 2009 10:51 AM]

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