कितना सिखाओगे मुझे?

नया प्रयत्न चेहरे पर मौन सजा लेते हो क्योंकि बताना चाहते हो मुझे मौन का मर्म, हर पल प्रेम और स्नेह से सहलाते हो मुझे शायद बताना चाहते हो एक स्नेही,एक प्रेमी का कर्म आकंठ डूब जाते हो हास्य में मेरे जैसे गर्हित की आस के लिये शायद देना चाहते हो यह जीवन-दर्शन कि 'जी... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु
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[21 Jan 2009 06:48 AM]

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